मेरे अन्दर का कवि फिर से जाग गया है (>:) और कुछ ही देर मे दो 'शानदार' poems लिख चूका है।
कविता क्र १
कविता क्र २
कविता क्र ३
गुरुवार, अगस्त 16, 2007
मेरे अन्दर का कवि
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मेरे अन्दर का कवि फिर से जाग गया है (>:) और कुछ ही देर मे दो 'शानदार' poems लिख चूका है।
कविता क्र १
कविता क्र २
कविता क्र ३
2 ?ि?्??ी:
आप के अन्दर का जो कवि जागा है...उसे बधाइ देते है ...लेकिन अगर रचनाएं हिन्दी में लिखे तो बेहतर होगा।
लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान ।
NishikantWorld
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