गुरुवार, अगस्त 16, 2007

मेरे अन्दर का कवि

मेरे अन्दर का कवि फिर से जाग गया है (>:) और कुछ ही देर मे दो 'शानदार' poems लिख चूका है।

कविता क्र
कविता क्र २
कविता क्र ३


2 टिप्‍पणियां:

परमजीत बाली ने कहा…

आप के अन्दर का जो कवि जागा है...उसे बधाइ देते है ...लेकिन अगर रचनाएं हिन्दी में लिखे तो बेहतर होगा।

Nishikant Tiwari ने कहा…

लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान ।
NishikantWorld