चींटी से साथी मेरे, सीखो तुम इक बात।
(14) (11)
मंजिल पाने के लिये, करो अथक प्रयास।।
(13) (10)
प्र = 2 matra or 1 ??
गुरुवार, अक्तूबर 12, 2006
दोहावली क्र॰ १ संशोधन-१
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1 ?ि?्??ी:
प्र(कोई भी संयुक्ताक्षर) दो मात्रा के तुल्य गिना जाता है।
चींटी से सीखो सदा, लाख तके की बात।
मंजिल पाने के लिये, लगे रहो दिन रात।।
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